तुमसे पहले



नज़रे खाली थी तुमसे पहले, प्यास बाक़ी थी तुमसे पहले
तुम मिली तो लगा बहुत कुछ बाक़ी था तुमसे पहले।
काश मैं होता अकेला अगर तुमसे पहले
तो प्यार कर लिया होता मैंने भी तुमसे पहले।

शिकायत न होती अगर मुझे अपने ही बोले शब्दों से
तो आज इज़हार किऐ बैठा होता तुमसे पहले
नज़रों से बोलना, आँखों से सुनने का इशारा देना
आदत सी लगती है तुम्हारी
शौक होता अगर मुझे भी एसा
तो प्यार कर लिया होता तुमसे पहले।

नादान समझता था मैं अपने आपको इन मामलों में
अगर पहले ही भनक पड़ जाती मुझे जवानी की अपने आप में
तो काश कोई और होता मेरी ज़िंदगी में तुमसे पहले।

न जाने वो कैसी जरुरत बन गई थी मेरी
न बात करने पर बोखलाहट सी होती थी
ज्याद बात करने से बातों का सिलसिला खत्म सा लगता था
फिर भी मन में था- बात खत्म नहीं करुंगा उसके कॉल काटने से पहले।

मिलती थी जब भी तो फरमाईशों से झोली भर देती थी मेरी
मैं समझता रहा उसे, वो बोली एक दिन फोन पर
कुछ तो फाएदा हो मेरा, तुम्हारे रूठ जाने से पहले।

बे-फज़ूल की बातों से वक़्त गुज़ारते रहे हम साथ में
समझ नहीं आता- इन बातों का अन्त क्या है?
जिस दिन तुम्हें समझ आ जाए तो बताना ज़रूर
इस किस्से को खत्म करुंगा तुमसे पहले।

saifu.

1 comments:

रश्मि प्रभा... November 10, 2009 at 2:56 PM  

कशमकश में डूबा मन किसी निर्णय पे आना चाहता है
तुमसे पहले........
बहुत ही बढिया

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